नमस्ते!
आजकल रियलिटी शोव्स की धूम हर चैनल पर है, रियलिटी शोव्स देखने में भी बढ़िया लगते है, कम से कम सास-बहु की किट-किट से तो छुटकारा मिलता है, हैं ना| लेकिन आजकल रियलिटी शोव्स, रियल न रहकर एक तरह से कह सकते है की “एक ऐसा Platform है, जहाँ पे फिल्म का प्रमोशन, Newly Launched Serial का प्रमोशन या फिर T.R.P. (Television Rating Point) बढाने के लिए रियलिटी शो में रियल दिखने वाली नौटंकी| फिर चाहे वो रियलिटी शो Sony Entertainment Channel का Indian Idol, Jhalak Dikh La Ja हो, Zee Tv का Sa-Re-Ga-Ma-Pa Challenge हो, Star Plus का Nach-Baliye, Star Voice Of India हो, Colors Television का Big-Boss हो, या फिर Mtv का Roadies हो|
रियलिटी शोव्स आज हर चैनल पे हमें देखने को मिल जायेंगे| लेकिन दोस्तों, आज रियलिटी शोव्स का जो स्वरुप है, मुझे कहते हुए भी शर्म आती है की पैसा कमाने के लिए लोग किसी भी हद तक जा सकते है, फिर चाहे दर्शकों के ज़ज्बात इनसे जुड़े हुए हो या दर्शकों की भावनाएं इनसे जुडी हुई हो, रियलिटी शोव्स बनाने वालों को इन बातों से कोई मतलब नहीं है, और अगर मतलब है तो सिर्फ अपनी T.R.P. बढाने से या फिर पैसा कमाने से|
दोस्तों आज टेलिविज़न सेरिअल्स को शुरू हुए लगभग 25साल (1984) हो चुके है या हम ये कहें की सिल्वर जुबली मना रहे है| यह एक बहुत लम्बा सफ़र है, 25 साल कम नहीं होते, इन 25 सालों में टेलिविज़न सेरिअल्स ने कहीं उतार-चढाव देखे| जब DD-National पर “हम लोग” नामक धारावाहिक शुरू हुआ तो कभी किसी ने भी ये नहीं सोचा होगा की, “हम लोग” जैसे सीरियल से शुरू हुआ ये टेलिविज़न सेरिअल्स का दौर पैसे कमाने के लिए इतना निचे गिर जायेगा| आज जो टेलिविज़न सेरिअल्स का स्वरुप है तो कभी-कभी ऐसा लगता है की काश “हम लोग” जैसे सेरिअल्स आज होते तो ये आज के सेरिअल्स के बीच अपने आपको किस श्रेणी में रखते या फिर शायद इनको भी रियलिटी शो का नाम देकर इनमें भी SMS Competition, Voting etc. शुरू कर देते और जो दर्शक है, जो जनता है यानी हम, फिर से रील की दुनिया में खो जाते|

