Kabhi Kabhi

December 28th, 2008 Admin Posted in Funtainment, Shayari, Urdu No Comments »

कभी कभी कुछ कर गुज़र जाने को जी चाहता है,
बस यूँ ही तेरी बाहों में मर जाने को जी चाहता है…..

जो गिरे अश्क तेरी आँखों से जहां से लड़ जाऊ में,
बन के हसीं तेरे होटों पे बिखर जाने को जी चाहता है…….

मेरी हर सांस तेरे तसव्वुर का अक्स नज़र आती है,
बनके धड्कन तेरे दिल में उतर जाने को जी चाहता है…..

तेरे दामन में सिमट जाऊ एक मासूम सी दुआ बनकर,
खुदा मानलू उसको, तो तेरे सजदे में गिर जाने को जी चाहता है…

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