Business Of Faith

एक के बाद एक आते धार्मिक चैनल| धार्मिक धारावाहिकों की बाढ़| बड़े-बड़े बाबाओं के प्रवचन, भजन, कीर्तनों की कैसेट, सी डी, डी वी डी, मोबाइल और इन्टरनेट पर भगवान् के नाम पर करोडों रुपयों का कारोबार| यह तो बानगी है, आस्था के नाम पर होने वाले कारोबार की| कई लुभावने तरीकों से आस्था का कारोबार फल फूल रहा है| नए कारोबारी धर्म के नाम पर मुनाफा कमाने का हर मौका भुना लेने पर उतारू है|
एक मोबाइल का विज्ञापन| ऊँचे पहाडों पर देवता के दर्शन करने पहुंची लड़की| अचानक उसे कुछ याद आता है| वह मोबाइल से घर का नंबर लगाती है और पहाडों के देवता के मंदिर की सुरीली घंटियाँ हजारों किलोमीटर दूर बेठी दादी को सुनाती है| दादी धन्य हो गई है| दरअसल ये केवल विज्ञापन नहीं है, बल्कि धर्म के धंधे का नया तराना है| इस धंधे के कारोबारी भी नए ज़माने के है| मंदिरों में बढती भीड़, दूरी, व्यस्तता जैसी दिक्कतों के चलते श्र्धालू दर्शन लाभ से वंचित न होने पाएं, इसकी चिंता में मोबाइल कम्पनियां, मंदिर प्रशासन, धार्मिक चैनल सभी लगे है| पूरा और पक्का बंदोबस्त किया जा रहा है कि मोबाइल फ़ोन, डी टी एच, इन्टरनेट, टी वी, एनीमेशन फिल्मों के जरिये देवता खुद भक्त के घर पहुंचे| धर्म के ये नए कारोबारी धर्म कि इन नयी कारोबारी संभावनाओं के जरिये मुनाफा कमाने का हर मौका भुना लेने पर उतारू है|
मोबाइल-मोबाइल में ईश्वर
मंदिर और भगवान् खुद आपके घर तक चल कर आ रहे है और जरिए बने हैं मोबाइल| मोबाइल पर भगवान भक्त से बस एक एस एम् एस, क दूरी पर है| भजन, पोस्टर, श्लोक, मंत्र, लाइव आरती सबकुछ मोबाइल पर है| मोबाइल पर पूजा तक हो रही है| एक एस एम् एस किया और जेब से 15-30 रुपये ढीले हुए| इतने खर्चे में कोई धार्मिक रिंगटोन या पोस्टर या मंत्र या भजन या फिर कोई श्लोक डाऊनलोड किया और पुण्य कि इस कमाई को दे दिया अपना योग ‘दान’| मोबाइल पर धर्म का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है| मोबाइल पर सबसे अधिक डाऊनलोड किये जाने वाले रिंगटोन में हनुमान चालीसा हमेशा टॉप 5 में बना रहता है| हंगामा मोबाइल के सलीम मोबानी बताते है कि म्यूजिक इंडस्ट्री में मोबाइल म्यूजिक का हिस्सा तक़रीबन 25% है और मोबाइल पर डाऊनलोड किये जाने वाले म्यूजिक में धार्मिक म्यूजिक का हिस्सा 15-20% है| मोबाइल म्यूजिक कारोबार के 2009 तक 800 मिलियन डॉलर का आंकडा पार कर जाने कि उम्मीद है|
एनीमेशन फिल्मों का फार्मूला
एनीमेशन फिल्मों में धर्म के बाज़ार को सबसे पहले भुनाया परसेप्ट के शैलेन्द्र सिंह ने| परसेप्ट ने 2005 में तक़रीबन 15 करोड की लागत से एनीमेशन फिल्म ‘हनुमान’ का निर्माण किया| ‘हनुमान’ ने बॉक्स ऑफिस पर 70 करोड से ज्यादा की कमाई की| आने वाले दिनों में करीब 15 एनीमेशन फिल्में रिलीज़ होनी है| इनमे से ज्यादातर- ‘अर्जुन’, ‘रिटर्न ऑफ़ रावण’, ‘जम्बो’, ‘कृष्णा’ आदि धार्मिक या मिथकीय चरित्रों पर आधारित है| बी आर फिल्म, एडलेब्स, प्रीतिश नंदी कम्युनिकेशन, यु टी वी, परसेप्ट और शेमारू जैसे दिग्गज कॉरपोरेट हाउसों के कई प्रोजेक्ट फिलहाल पाइपलाइन में है|
धार्मिक चैनलों की जय -जय
टी वी चैनलों पर धर्म के धंधे को सबसे पहले सोनी और जी टी वी ने पहचाना| 90′ के दशक में दोनों चैनलों पर सुबह प्रवचनों का प्रसारण शुरू हुआ| इसके बाद कुछ इलाकों या राज्यों की सीमा में सिमटे कथा वाचकों की ग्लोबल पहचान बनने लगी| लोग टी वी सेटों के जरिये ही धन्य होने लगे| 24 घंटे मोक्ष देने का कारोबार सबसे पहले ‘आस्था’ चैनल की लौन्चिंग से शुरू हुआ| इसके बाद ‘संस्कार’ और फिर ‘साधना’ चैनल आया| आज हालत यह है की ‘आस्था’, ‘संस्कार’, ‘साधना’, ‘प्रज्ञा’, ‘जी जागरण’ के दर्शकों की संख्या में बिज़नस और अंग्रेजी न्यूज़ चैनलों को भी पीछे छोड़ दिया है| धार्मिक चैनलों से जुड़े लोगो की माने तो धर्म के इस धंधे में चैनल मालिको, बाबाओं, विज्ञापन दाताओं सबकी जय-जय है|
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